अब मैं भी हाजिर हूँ ... अपनी टूटी-फूटी के साथ
मेरे अज़ीज हिन्दी चिठ्ठाकार सज्जनों, एक जद्दोजहद मेरे मन में बहुत दिनों से थी। ...आज उसे परे धकेलकर मैने फ़ैसला कर ही लिया। जी हाँ, मैने अपना एक अलग ब्लॉग बना लिया है। मैं हिन्दी भाषा और टाइपिंग की बहुत अच्छी जानकार नहीं हूँ। बस मुझे टूटी-फूटी ही आती ह...
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रचना त्रिपाठी
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[29 Apr 2009 20:31 PM]



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