इश्वर या खुदा
क्या हुआ मस्जिद गिरा के, जब न मंदिर बन सका | तेरे आपसी षडयंत्र से , बिन छत के मौला रह गया | मेरे लिए जो राम है, तेरे लिए रहमान है | अंतर था केवल नाम का, जिससे खुदा तक बँट गया | सोचा न था उसने कभी, जिसने दिया था जन्म फिर, क्यूँ हाँथ में तलवार ले , भाई...
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Tapashwani Anand
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[29 Apr 2009 07:09 AM]



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