अब उसी दरिया को पानी चाहिए
सुर्ख सुबह शाम सुहानी चाहिए ।जिंदगी भर खींचा-तानी चाहिए॥काट कर पर्वत भगीरथ की तरहकाम की गंगा बहानी चाहिए ॥कल जहाँ रुकते थे प्यासे काफिलेअब उसी दरिया को पानी चाहिए॥सींच डाले जो ज़मीं को खून से ,इस धरा को वो जवानी चाहिए ॥मंदिरों में क़ैद ईश्वर को 'मनोज'ख...
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naturica
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[28 Apr 2009 22:34 PM]



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