जूता संस्कृतिः “बहस”
अभी पिछली पोस्ट जल्दी-जल्दी में मैंने जूतम-बजारी पर लिखी थी और कल ही पराशर गौड़ जी ने अपनी खुद की लिखी ये कविता मेल से भेजी, जिसमें जूते और चप्पलों की बहसबाजी है इस बात की कि कौन बड़ा?
जूते चप्पलो में
हो गई बहस
छिड गई लड़ाई
लगे करने दोनों
अपनी अपनी बड...
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Tarun
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[28 Apr 2009 21:48 PM]



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