आपकी खातिर कुछ....
जिन्दगी यूँ गुजर जायेगी आहिस्ता आहिस्ता, घड़ी भी पाबंदी लगायेगी आहिस्ता आहिस्ता, बेशक, तुम मुझे याद रखोगी कुछ दिन तलक, फिर भूल भी मुझे जाओगी आहिस्ता आहिस्ता. *~*~*~*~* वो नाराज होता है कि कुछ लिखते नहीं , कहाँ से लायें वो लफ्ज जो मिलते नहीं , दर्द की...
[पूरी पोस्ट]
संजय तिवारी ’संजू’
24
2
0
2
1
[28 Apr 2009 21:10 PM]



Shuffle








