कहाँ अब किनारे भी बच पायेगे

प्रकाश पाखी १) किनारे को गर किनारा चाहिए, नहीं अब दरिया दुबारा चाहिए , ओ मेरी दामन की लहरों , किसे अब यहाँ ठिकाना चाहिए , दरिया और लहरें निकल जायेंगे , दोनों किनारे भी मिल जायेंगे , बचेगी फकत माटी इस राह पे , कहाँ अब किनारे भी बच पायेगे (२) दर्द दिल के करीब हो त... [पूरी पोस्ट]
writer abhivyakti
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[27 Mar 2009 23:41 PM]

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