सच सच कहना आज कहाँ है...

प्रकाश पाखी जिन गलियों में तुम और मैं कदम कदम पर साथ चले थे उन गलियो की उड़ती धूल मन में मीलो महक रही है चौराहों पर घंटो घंटे बातों बातों बिता दिए थे मूंग फलियो के उन छिलकों में कुछ कुछ दाने मेरे भी थे मूवी में वो मीठी सीटी बजा बजा के मजे लिए थे आगे बैठी सुन्दर... [पूरी पोस्ट]
writer abhivyakti
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[27 Mar 2009 23:40 PM]

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