तेजा बा की कुर्सी

प्रकाश पाखी काफीदिनों से अपनी एम्प्लोय्बिलिटी अथवा रोजगार प्राप्त करने की क्षमता बढ़ाने की सोच रहा था।परन्तु रोजगार हमें पंचम वर्ण में शामिल जातियों की भांति अस्पृश्य मानते हुए हमारी छाया से भी सावधानी से दूरी बनाये हुए था.पिछले कई दिनों से हमारी बढ़ी हुई दाढी भी... [पूरी पोस्ट]
writer abhivyakti
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[27 Mar 2009 23:38 PM]

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