एक पहलवान का पहला प्यार
अखाडे में सुबह की कसरत करके हमने अपने गुरु उदैसिंघ जो पहलवानी और जिंदगानी के हमारे इकलौते गुरु थे को प्रणाम किया और घर की ओर चल दिए.गुरूजी वैसे तो कॉलेज में हिंदी पढाते थे पर वंहा भी उनकी शैली अखाडे के मुगदर घुमाने से मिलती जुलती थी. अखाडे से निकलते...
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abhivyakti
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[25 Apr 2009 08:53 AM]



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