तेरे इंतजार में
अक्सर खड़ा पाता हूँ ख़ुद को , कल्पनाओं की देहरी पर , अदृश्य रंगों की तलाश में , हर दिशा में उभरते - मिटते , अधूरे बिम्बों को निहारते , शायद कहीं मेरे प्यार सा , कोई रंग मिल जाए । धूप गुलाबी है , ख्वाब आसमानी हैं , स्वप्न रेतीले टीले हैं , सोच बहता पा...
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Navnit Nirav
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[28 Apr 2009 12:10 PM]



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