बड़े नादाँ हो, हिन्दुओं की बात करते हो!

कहासुनी सवेरे टहल रहा था, तो पड़ोस के मिश्रा जी मिल गए। मेरी ही सोसायटी में दो विंग छोड़कर उनके फ्लैट है। सरकारी नौकर हैं और जैसे सारे नौकर अपने मालिक को गरियाते रहते हैं, वैसे ही मिश्रा जी भी सरकार को गरियाते रहते हैं। तो देखा कि दुखी थे बेचारे और नाराज़ भी।... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ कृष्ण
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[28 Apr 2009 06:50 AM]

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