सात बेटियों का काफिला शाम चार से सात

बेटियों का ब्‍लॉग मैं रोज सोचती हूं कि कुछ लिखुं अपनी बेटियों के विषय में कैसे वह दोनो बड़ी हो रही है। एक दूसरे को तंग करते हुए। मेरी श्रुति उसे प्यार से मेरी बेटी पुचाकरती है और मिठी उसका स्केच पेन उसके बैग से निकाल कर भागती है कि कहीं उसे श्रुति देख कर उस से छीन ना... [पूरी पोस्ट]
writer पुनीता
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[28 Apr 2009 05:59 AM]

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