परिंदे हमसे कोई घोसला बना ना सके।

हृदय गवाक्ष जहाँ तक याद है कि पिछले डेढ़ साल से गुरु जी की गज़ल क्लासेज़ ले रही हूँ, लेकिन सिवाय तहरी मुशायरों या होमवर्क के कभी भी गज़ल लिखने की खुद से हिम्मत नही पड़ी। हाँ ये ज़रूर है कि गज़ल सझ के जो लिखती थी उसे भी लिखना छोड़ दिया, क्योंकि पहले तो उतना ही जानती... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
views
53
upvote
9
downvote
0
rating
9
comments
24
[28 Apr 2009 02:47 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix