जूही चावला की डायरी (व्यंग्य)

Hindi 2.0 | हिन्दी २.० तारीख़- 27 अप्रैल वक़्त- रात के 11 बजे जगह- पोर्ट एलिज़ाबेथ मुझे डायरी लिखने का शौक़ नहीं है। लेकिन किस पर भड़ास निकालूँ? जय यहाँ आते तो शायद उन्हें चार-छः सुना देती । वो आए नहीं, और शाहरुख़ को सुनाना मुमकिन नहीं है। इसलिए इन काग़ज़ों पर ही अपना ग़ुस्सा निका... [पूरी पोस्ट]
writer Pratik Pandey
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[28 Apr 2009 02:40 AM]

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