ओ मेरे मितवा

Dhirendra Singh इन्टरनेट जगत में राजभाषा विषय पर गिने-चुने लोग ही दिखलाई पड़ते हैं जिनके स्वर में हमेशा एक पुकार सुनाई पड़ती है जैसे विरह वेदना में मन पुकार उठे “आ जा तुझको पुकारे मेरे गीत रे ओ मेरे मितवा”। यह पुकार किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं है बल्कि यह आवाज़ ए... [पूरी पोस्ट]
writer धीरेन्द्र सिंह
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[28 Apr 2009 01:23 AM]

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