दो का नोट

किस्सा-कहानी मम्मी तुम भी कमाल करती हो! भला दो रुपये लेकर मेला जाया जा सकता है?" "क्यों? दो रूपये ,रुपये नहीं होते? फिर तुम्हें झूला ही तो झूलना है, इसमें तो दो बार झूल लोगी..." "अच्छा!!! किस जमाने में हो तुम? दो रूपये में तो झूले वाला झूले की तरफ देखने भी नहीं द... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे
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[10 Apr 2009 04:53 AM]

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