बहन छायावती और छज्जू बाबा

संदीप शर्मा पर माननीय न्यायाधीश महोदय... ये आज मुझे पप्पी देना चाहता है, कल को कुछ और देने की कोशिश करेगा...' `तो...' न्यायाधीश ने नाक से चश्मा खिसकाया। `तो क्या महोदय... आज तो मैं कुर्सी पर हूं। जवान हूं, अपनी रक्षा स्वयं करना जानती हूं। कल बूढ़ी भी होऊंगी। तब ह... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप शर्मा
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[27 Apr 2009 15:22 PM]

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