टिप्पणी का रोना क्यों ?
एक साहब कहते है फलां चिठे को टिपण्णी नही मिलती फलां कितना अच्छा है ,फलां को भी नही मिलती फलां उससे भी अच्छा है.ये तो अजीब बात हुई भाई हमें पसंद नही गजल /गीत /गाने तो क्यों करे उन पे टिप्पणी ?ये तो जबरदस्ती वाली बात है जी की हमें ये पसंद तो आप भी करो...
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नटखट बच्चा
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[27 Apr 2009 11:07 AM]



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