काश! ऑनलाइन मिलता खाना

shuruwat : जिंदगी सिखाती है कुछ ये साला ऑनलाइन रहने का चस्‍का भी अजीब है। बाहर निकलना हो और पारा 42 डिग्री पार हो तो घर से निकलने का मन ही नहीं करता। कम से कम जब नेट अच्‍छी स्‍पीड में चल रहा हो। यूं रोज रात देर से खाने की आदत है। पर कल एक दोस्‍त की सगाई थी, इसलिए शाम का खाना जल्‍दी... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव जैन Rajeev Jain
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[27 Apr 2009 08:17 AM]

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