मैं, मेरे पिता और तालिबान

खुली खिड़की कीबोर्ड की टिकटिक से कोसों दूर, अपने होमटाउन में पूरा एक महीना बीत किया. लेकिन तालिबान ने वहां पर भी पीछा नहीं छोड़ा. खबरिया चैनलों के कारण हर घर में तालिबान टीवी की स्क्रीन पर नजर आता है, लोगों के दिमागों पर ही नहीं छाया बल्कि लोगों की जुबां पर भी ता... [पूरी पोस्ट]
writer कुलवंत हैप्पी
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[27 Apr 2009 04:18 AM]

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