कभी वक्त मिले मुझसे, तुम मिलने आ जाना.....

MERA SAGAR जज़्बात महोब्बत के, सीने में धङकते हैं, फुरसत में कभी तुम भी, इससे सुनने आ जाना। मैं तन्हा हूं फिर भी, कुछ बाते करती हूं, कभी वक्त मिले, मुझसे, तुम मिलने आ जाना। रह-रह के मचलता र्है, आंखों में जो बसता है, वो सपना बनकर के, तुम मुझको सुला जाना। मैं नीं... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[26 Apr 2009 20:42 PM]

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