मैं न सोने से डरती हूं....

उनींदरा मैं सोचती थी कि हम एक-दूसरे की आत्‍मा तक को देख सकते हैं, कि हम जुड़े हुए हैं, एक-दूसरे से....सियामी जुड़वाओं की तरह संबद़ध हैं। उसने ख़ुद को मुझसे दूर कर लिया था, मुझसे झूठ बोला था, और मैं यहां बैठी थी, कैफे़ की बेंच पर अकेली। मैं लगातार उसके चेहरे... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[26 Apr 2009 17:26 PM]

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