कर्म महान है (लघु कथा)

रचना का स्वप्निल सृजन सुबह-सुबह अतिप्रसन्नता से मयंक का दिल नाच उठा जब कम्प्यूटर की सूखी कार्टरेज़ जिसे उसने रात भर पानी में डुबोए रखा था इसी उम्मीद से कि शायद चल जाए। वही कार्टरेज़ धकाधक सुन्दर शब्दों को कागज़ पर फर्राटे से छाप रही थी। यकायक उसकी निगाह उसकी पत्नी पर पड़ी... [पूरी पोस्ट]
writer रचना गौड़ ’भारती’
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[26 Apr 2009 13:47 PM]

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