समेत लो,कुछ दे कर जा रहा है..गुजरता पल !
मिनट ,घंटा ,दिन, महीने, साल गुजरते चले जाते हैं- हम चाहें या न चाहें!सुख-दुःख,अच्छा- बुरा कुछ न कुछ ज़रूर होता है बीते सालों में ,हर किसी के साथ!कभी कोई कड़वी याद हमारा मन कसैला करदेती है तो कभी सुखद दिनों की यादे अपनी बौछारों से हमें भिगो जाती हैं!ह...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[26 Apr 2009 13:33 PM]



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