तीसरा विकल्प और अखबारी लेख
आजकल चुनावी करतब का जोर है इसलिए नए-नए राजनीतिक विश्लेषक भी पैदा हो गए है और उनको जगह मुहैया कराते अखबार भी। इन लेखों को आप देखें तो समझ जाएँगें कि ये बौद्धिक जुगाली की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। बौद्धिक अंधविश्वास जैसी उक्ति से भले ही आप न परिचित...
[पूरी पोस्ट]
राम प्रकाश द्विवेदी
23
1
0
1
2
[26 Apr 2009 12:53 PM]



Shuffle








