टेड़ी सिलायी उधड़ा बखिया ...ये जीना भी कोई जीना है

मेरे आस-पास कल उसकी नौकरी चली गई। बैंक की नौकरी। अकसर मेरी उससे बात होती थी। कभी बैेंक काउंटर पर तो कभी बैंक के काम से। काफी अच्छे घर की बच्ची थी। नौकरी गंवाने के दो दिन बाद वह मेरे पास आई। बोली.......मुझे अहसास भी न था कि ऐसा हो जायेगा.....नौकरी जाने का गम नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER
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[26 Apr 2009 06:26 AM]

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