कविता के मर जाने की ख़बर...
ऐ से विकट एवं अराजक समय में--जबकि जीवन के सारे आयाम, सारे अनुशासन और इसलिए साहित्य भी छद्म आकांक्षाओं, कृत्रिम सरोकारों, जटिलताओं एवं महत्त्वाकांक्षी दांव-पेंच से निरंतर आक्रांत हैं--हमें कुछ ऐसे ठोस और प्रभावी तिनकों की फिर भी जरूरत है जो हमें एक सह...
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योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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[26 Apr 2009 04:45 AM]



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