रास्ता भूलने के दिन
ये कत्ल करने की साजिशों के दिन थे अंधेरों ने रोशनी के कमजोर हिस्सों में सेंध लगा कर काले घने अंधियारे के साम्राज्य की नींव में कुछ और ईंटें जमा ली थी, चार महीने पहले मैं जिस आदमी को अचरज भरी निगाहों से देख रहा कि महाविद्यालय में अंग्रेजी के प्राद्याप...
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Kishore choudhary
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[26 Apr 2009 03:29 AM]



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