सब ताज उछाले जायेंगे
जब जुल्मो-सितम के कोहे-गरां रुई की तरह उड़ जायेंगे हम महकूमों के पांव तले ये धरती धड़ -धड़ धड़केगी और अहले -हकम के सर ऊपर जब बिजली कड़ -कड़ कड़केगी हम देखेंगे .......................... सब ताज उछाले जायेंगे सब तख्त गिराए जायेंगे हम देखेंगे ..............
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jayram
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[25 Apr 2009 23:11 PM]



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