संस्मरण - 1

मनीष उवाच! बहुत पहले जब मैं एक छोटा सा बच्चा हुआ करता था और शायद एल के जी या यू के जी में रहा होऊंगा या शायद और बड़ा, तब एक मजेदार घटना घटी थी। हम दोनों भाई काफ़ी धमा चौकडी मचाया करते थे और हमारे पापा जी अक्सर हमें पढ़ाई के लिए डांटा करते थे। उनका एक तकिया कलाम... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
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[28 Feb 2008 13:08 PM]

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