जो कहा था, वहीं हुआ दिल्ली में
मित्रों, एक बार फिर हाज़िर हूं एक नए लेख के साथ। नया कहना तो ग़लत होगा। लेकिन उसी बात को मैं फिर से कहने जा रहा हूं लेकिन अपने कुछ मित्रों की प्रत्रिक्रियाओं के साथ , जिन्होने मेरा लेख पढ़कर ईमानदारी से अपनी बात कही थी। मैने जो लेख लगभग सवा दो महीने...
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Chandan Pratap Singh
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[09 Dec 2008 08:32 AM]



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