भुवनेशजी को उनके जन्मदिवस पर ढ़ेर सारा प्यार और शुभकामनाएँ।
मौहल्ले में सुबह से ही सन्नाटा छाया हुआ है, गली, कुमचे की क्या बात करें हाई-वे पर सुबह से कोई दिखाई नहीं दे रहा है। जिन्हें ज्ञात नहीं वे कयास लगा रहें है कि बिना कर्फ्यू के इंसान से दिखने (?) वाले जानवर यकायक दुबककर क्यों बैठें है। पुस्तकों के रसिया...
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गिरिराज जोशी
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[09 Sep 2007 03:37 AM]



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