होली पर असभ्य होने का सुख…

शत् शत् नम मैं सुबह-सवेरे उठकर घर से बाहर निकला ही था कि एक अनजानी सी आवाज सुनाई दी, “क्या आप गिरिराज हैं?”... “जी हाँ, आप...?”, मैने चहरे पर कुछ हद तक झुर्रियाँ बनाते हुए पूछा। “होली है...”, कहते हुए उन सज्जन नें मुझे रक्तनुमा दिखाई देने वाले रंग से रगड़ना शुरू... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज जोशी
views
32
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Sep 2007 03:37 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix