अलविदा सागर भाईसा…
चिट्ठाजगत में बहुत समय बर्बाद कर लिया, अब फिर से ध्यान अपने धंधे-पानी पर लगायेंगे”, यह उद्दगार हैं एक ऐसे चिट्ठाकार साथी का जो बिलकुल पानी की तरह है... स्वच्छ भी और शांत भी। मगर जब उबलते हैं तो खूब उबाल मारते हैं, उनकी धमकियों को सर्वाधिक टिप्पणियाँ...
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गिरिराज जोशी
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[09 Sep 2007 03:37 AM]



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