यह क्या किया प्रमेन्द्र?

शत् शत् नम भाई प्रमेन्द्र, आपको याद होगा, अभी कुछ दिन पूर्व आपने अपनी 100वीं पोस्ट की खुशी व्यक्त करते समय हमारी मित्रता का ख्याल रखा था और आपने स्वयं को मिले प्रस्ताव को मेरी तरफ़ रिडायरेक्ट कर दिया था। तुमने जो हाई रिस्क लेते हुए मध्यस्थता करने का साहस किया है... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज जोशी
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[10 Sep 2007 06:13 AM]

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