बडे बेआबरू हो कर 'उस' कूचे से हम निकले...
इंसान एक जगह टिक कर नहीं बैठ सकता. और फिर अगर आप मीडिया में हों तब तो कभी एक जगह टिक ही नहीं सकते. और सही भी है आगे बढने का हक तो सभी को है.. में तो अक्सर अपने दोस्तों से कहता हूं की 'छोटे सपने देखना पाप है'... हुआ यूँ की कुछ दिन पहले मैं एक नई मासिक...
[पूरी पोस्ट]
SUNIL DOGRA जालिम
दास्ताँ-ए-जालिम
7
1
0
1
0
[01 Apr 2008 08:33 AM]



Shuffle








