दिल को किसी सूरत बहलाना नहीं आता...
अप्रैल 09 निगाहों में कभी माज़ी का अफसाना नहीं आता मगर दिल को किसी सूरत भी बहलाना नहीं आता हुई मुद्दत बहार आए,सूनी पड़ी है दिल की महफिल भी हमारी ओर कोई दिल की दीवाना नहीं आता न बह जाए कहीं दिल से,तुम्हारी याद की रंगत इसी डर से हमें तो अश्क बरसाना नही...
[पूरी पोस्ट]
अनिल कुमार वर्मा
17
1
0
1
2
[25 Apr 2009 14:25 PM]



Shuffle








