आदतें
याद है तुमको.. पिछली बारिश में जब भीगते हुए सड़क के किनारे वाली रेहड़ी पर जहाँ हमने एक ही प्याली में चाय पी थी टप-टप...पत्तियों से छन के आती बूँदें बार बार उस प्याली में गिरती थी उसकी मिठास मगर बदली नहीं थी तुम्हारे लबों से बार-बार लगती जो थी.. वहीँ...
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केतन कनौजिया 'शाइर'
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[25 Apr 2009 13:50 PM]



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