तुम

kuch sapno ki khatir तुम्हारी मुस्कराहट मेरे दिल को चुरा ले जाती है ! मैं कुछ कहना भी चाहूँ तो मुझे वो रोक लेती है ! सर्दियों में ओस की बूँद से अगर खेलना चाहूँ , न जाने क्यूँ तुम्हारी तस्वीर उभर के आती है ! पास अपनी हरदम महसूस होता है एक साया , तुम्हारी हर इक अदा नज़र उसम... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[25 Apr 2009 06:14 AM]

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