ओ पिता हमें क्षमा करना

मन की बात आत्मा बेच आया हूँ और उदास हूँ ओ पिता हमें क्षमा करना. पूछो कितने में? तो सौदा बहुत सस्ता था अनमोल नगीना बेमोल बिक गया बेकीमत ही समझो चंद सुविधाएँ चंद बेफ्रिकी और महीने की पगार बस यही मोल था एक अदद ज़मीर का. आत्मा थी जागृत तो थीं तमाम दिक्कतें बेवजह उठ... [पूरी पोस्ट]
writer Atmaram Sharma
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[25 Apr 2009 05:04 AM]

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