रसीदी

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) आज घर की सफाई के दौरान जब सारी सर्दियों भर की रद्दी उठा कर बेसमेंट में रखने गया तो अनायास ही उसका ख्याल आ गया। गर्मी के आगमन के साथ ही बाहर पसरी पड़ी बर्फ ने अपने पाँव सुकड़ने शुरू कर दिए थे अतः नयी नवेली कोमल धूप का आनंद लेने जबतक मैं चाय की प्याली क... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[24 Apr 2009 13:38 PM]

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