न कोई फूल दामन में मेरे
वक् त के कर्कश थपेडों ने खडा कर दिया आज मुझे उस मोड पर जहां से पीछे हटने का नहीं है हौसला मुझमें आगे बढने की ताकत नहीं मुझमें ये एक मोड जिंदगी का मेरे है खतरनाक चंद कांटे ही कांटे हैं न कोई फूल दामन में मेरे पराए तो पराए ही थे अब न रहे अपने भी मेरे...
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मोहन वशिष्ठ
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[24 Apr 2009 10:48 AM]



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