काफल, हिसालु और किलमोड़ी के बहाने

हिमाल : अपना-पहाड़ दो घंटा पहले काफल की एक लो ककथा लिखी थी। और फिर मैं सो गया। अचानक नींद में कुछ सूझने लगा। इस बार काफल के साथ हिसालु और किलमोड़ी आए थे। तीनों मेरी उंगली पकड़कर मुझे बच पन में खीं च ले गए। नींद खुल गयी है , अब क्या करुं ? सोचा क्यों ना उन पन्नों को पलट... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट
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[24 Apr 2009 08:41 AM]

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