पाप
से फ़रोग फ़रोखज़ाद की एक कविता अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र कविता के साथ चित्र : अवधेश पाप बाँहों मैंने पाप किया पर पाप में था निस्सीम आनंद समा गई गर्म और उत्तप्त में मुझसे पाप हो गया पुलकित, बलशाली और आक्रामक बाँहों में। एकांत के उस नीरव कोने में...
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भगीरथ
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[24 Apr 2009 02:11 AM]



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