अशोक चक्रधर ; शब्द का चितेरा;कविता का दिव्य-स्वर
अभी पिछले हफ़्ते ही की बात है कि हिन्दी कविता के नामचीन हस्ताक्षर अशोक चक्रधर को अपने नगर न्योतने का मौक़ा मिला. सुनता तो उन्हें अस्सी के दशक की शुरूआत से ही आया था और एक दो अवसरों पर मिला भी लेकिन चूँकि इस बार मेज़बान का हक़ अदा करना था सो नज़दीक़ी कुछ ज़्...
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संजय पटेल...
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[23 Apr 2009 23:05 PM]



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