गजल-- रात गर हूँ -- वीनस केसरी
रात गर हूँ फिर सहर हूँ . गाँव जैसा इक शहर हूँ . हसरतों की रहगुजर हूँ . कर के वादा मुन्तजिर हूँ . अपने फन से बा खबर हूँ . चख के कह दो मैं जहर हूँ (2122) फा-इ-ला-तुन...
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venus kesari
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[23 Apr 2009 16:34 PM]



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