मैं तेरी सौगात लिए...

संवेदना अप्रैल 09 दीप जलाए अश्कों के और आहों के नग्मात लिए कौन आया है ज़ेहन में मेरे,यादों की बारात लिए काली घटा को देख के,आई याद तुम्हारी जुल्फों की सावन ऋतु आई है लेकिन अश्कों की बरसात लिए अपनी अपनी बात सुनाई,सबने तुम्हारी महफिल में बैठे रहे हम ही तन्हा,दि... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
views
25
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
7
[23 Apr 2009 14:22 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix