असमंजस, क्या हम सही हैं?
आफिस के बाद आजकल रोज चाय पीने का चस्का लग गया है। हम लोगों की एक मंडली भी तैयार हो गई है, जो अमूमन रोज चाय पीने जाती हैं। दो बजे के बाद सुबह लगभग चार बजे तक यहां बैठना हमारी आदत में शुमार हो गया है। रोज वहां चाय के बहाने अड्डा जमाने से हम लोगों की च...
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राजीव जैन Rajeev Jain
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[23 Apr 2009 08:37 AM]



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