फागुन के दिन चार रे: आशाताई की आवाज और राग होरी सिन्धूरा

गीतों की महफिल आशाताई ने अपनी गायिकी में जो जो प्रयोग किये उनमें से कई हमने देखे- सुने हैं। संजय भाई पटेल जी ने हमें आशाजी की आवाज में मियां की मल्हार में एक तराना सुनाया था जिसे आज भी मैं कई बार सुनता रहता हूँ। आज मैं आशाजी के एक नये प्रयोग के बारे में बता रहा हूँ... [पूरी पोस्ट]
writer सागर नाहर
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[23 Apr 2009 06:04 AM]

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