क्षितिज
तुमने कहीं वो क्षितिज देखा है , जहाँ , हम मिल सकें ! एक हो सके !! मैंने तो बहुत ढूँढा ; पर मिल नही पाया , कहीं मैंने तुम्हे देखा ; अपनी ही बनाई हुई जंजीरों में कैद , अपनी एकाकी ज़िन्दगी को ढोते हुए , कहीं मैंने अपने आपको देखा ; अकेला न होकर भी अकेला...
[पूरी पोस्ट]
Vijay Kumar Sappatti
28
3
0
3
22
[23 Apr 2009 03:32 AM]



Shuffle








